यह बहुत ही सुंदर विषय है! स्वर्गदूत गाब्रिएल (Gabriel) और मरियम (Mariam) के बीच हुई उस पवित्र बातचीत को एक कहानी के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।
यह कहानी सीधे तौर पर बाइबिल के लूका रचित सुसमाचार, अध्याय 1, से प्रेरित है।
मरियम और स्वर्गदूत गाब्रिएल
गलील प्रदेश के नासरत नामक एक छोटे से शहर में, मरियम नामक एक युवती रहती थी। वह बहुत शांत, धर्मपरायण और विनम्र स्वभाव की थी। उसकी सगाई युसुफ नामक एक धर्मी पुरुष से हो चुकी थी। एक दोपहर जब मरियम अपने घर में थी और प्रार्थना में लीन थी, तो उसके कमरे में एक अद्भुत, दैवीय प्रकाश फैल गया।
उस प्रकाश के बीच, एक तेजस्वी आकृति खड़ी थी—यह स्वयं स्वर्गदूत गाब्रिएल (Gabriel) थे, जिन्हें परमेश्वर ने एक विशेष संदेश के साथ भेजा था।
गाब्रिएल ने अपनी आवाज़ में मधुरता भरकर कहा:
स्वर्गदूत गाब्रिएल: “प्रणाम, हे कृपापूर्ण! प्रभु तेरे साथ है, तू स्त्रियों में धन्य है।”
मरियम ने जब स्वर्गदूत को देखा और उनके वचन सुने, तो वह डर गई और सोचने लगी कि इस प्रकार के अभिवादन का क्या अर्थ हो सकता है।
स्वर्गदूत ने मरियम के हृदय के भय को पहचान लिया और प्रेम से कहा:
स्वर्गदूत गाब्रिएल: “डर मत, मरियम, क्योंकि परमेश्वर की ओर से तुझ पर अनुग्रह हुआ है। सुन! तू गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म देगी, और उसका नाम यीशु रखना। वह महान होगा और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा, और प्रभु परमेश्वर उसे उसके दादा दाऊद का सिंहासन देगा, और वह याकूब के घराने पर सदा राज करेगा, और उसके राज्य का कभी अन्त न होगा।”
यह बात सुनकर मरियम को बड़ा आश्चर्य हुआ। यह कैसे संभव था? उसने अपनी शंका को अत्यंत विनम्रता से गाब्रिएल के सामने रखा:
मरियम: “यह कैसे हो सकता है, क्योंकि मैं तो पुरुष को नहीं जानती?”
गाब्रिएल ने मरियम के प्रश्न का उत्तर देते हुए उस अलौकिक शक्ति के बारे में बताया जो इस चमत्कार को सिद्ध करेगी:
स्वर्गदूत गाब्रिएल: “पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगी, और परमप्रधान की सामर्थ्य तुझ पर छाया करेगी। इसलिए वह पवित्र बालक जो उत्पन्न होगा, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। और देख, तेरी कुटुम्बिनी एलीशिबा भी, जो बूढ़ी कहलाती थी, वह भी गर्भवती है; क्योंकि परमेश्वर के लिए कोई भी बात असम्भव नहीं है।”
जब मरियम ने सुना कि परमेश्वर के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है और उसने इस महान योजना में अपनी भूमिका को समझा, तो उसके हृदय में विश्वास और समर्पण का भाव जाग उठा। उसका डर समाप्त हो गया और उसने अपनी इच्छा को परमेश्वर की इच्छा के अधीन कर दिया।
मरियम ने अपने जीवन को प्रभु की सेवा में समर्पित करते हुए उत्तर दिया:
मरियम: “देख, मैं प्रभु की दासी हूँ। मेरे लिए तेरे वचन के अनुसार हो।”
जैसे ही मरियम ने ये शब्द कहे, स्वर्गदूत गाब्रिएल उससे विदा होकर स्वर्ग लौट गए, और मरियम एक ऐसे ईश्वरीय रहस्य की साक्षी बनकर रह गई जिसने संसार के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
