यह वृत्तांत हमें ईश्वर के पुत्र यीशु मसीह के मृत्यु पर विजय और पिता के दाहिने हाथ विराजमान होने की महान घटना को बताता है, जैसा कि पवित्र बाइबल के सुसमाचारों और प्रेरितों के काम में वर्णित है।
1. महिमामय पुनरुत्थान (Glorious Resurrection)
क्रूस पर अपनी मृत्यु के बाद, यीशु के शरीर को एक कब्र में रखा गया था। परन्तु तीसरे दिन, जब सप्ताह का पहला दिन शुरू हुआ, एक अद्भुत घटना घटी।
मैग्दलीनी मरियम और कुछ अन्य महिलाएँ यीशु के शरीर पर इत्र लगाने के लिए कब्र पर पहुँची। उन्होंने पाया कि कब्र का द्वार खोलने वाला बड़ा पत्थर हटा दिया गया था, और कब्र ख़ाली थी। उन्हें डर और आश्चर्य हुआ। बाइबल बताती है कि वहाँ एक स्वर्गदूत प्रकट हुआ।
“तब स्वर्गदूत ने उन स्त्रियों से कहा, डरो मत; मैं जानता हूँ कि तुम यीशु को, जो क्रूस पर चढ़ाया गया था, ढूँढ़ रही हो। वह यहाँ नहीं है, परन्तु अपने कहे के अनुसार जी उठा है…”
(बाइबल पद: मत्ती 28:5-6)
स्वर्गदूत ने उन्हें जाकर चेलों को यह शुभ समाचार सुनाने का निर्देश दिया। जैसे ही वे जा रही थीं, यीशु स्वयं उनसे मिले और उन्हें शांति दी।
2. चालीस दिन का समय और प्रकटीकरण (The Forty Days and Appearances)
अपने पुनरुत्थान के बाद, यीशु ने पृथ्वी पर चालीस दिन बिताए। इन दिनों में उन्होंने अपने चेलों और सैकड़ों अन्य अनुयायियों को कई बार दर्शन दिए। ये दर्शन उनके जी उठने के सत्य के अकाट्य प्रमाण थे।
अ. एम्माऊस के मार्ग पर
दो चेले एम्माऊस गाँव की ओर जा रहे थे और वे दुखी मन से यीशु के विषय में बातें कर रहे थे। यीशु उनके साथ हो लिए, परन्तु उनकी आँखें बंद थीं, इसलिए वे उन्हें पहचान नहीं पाए। यीशु ने उन्हें शास्त्र (पुराने नियम) से समझाया कि मसीह को दुःख उठाना और महिमा में प्रवेश करना क्यों आवश्यक था। जब वे भोजन के लिए रुके और यीशु ने रोटी तोड़ी और आशीर्वाद दिया, तब उनकी आँखें खुल गईं और उन्होंने यीशु को पहचान लिया।
“…तब उन्होंने एक दूसरे से कहा, जब वह मार्ग में हम से बातें करता और हमारे लिये पवित्रशास्त्र का अर्थ खोलता था, तो क्या हमारा मन हमारे भीतर जल न रहा था?”
(बाइबल पद: लूका 24:32)
ब. थोमा का संदेह (Doubting Thomas)
एक बार जब यीशु अपने चेलों के बीच प्रकट हुए, तो थोमा (डिडुमुस) अनुपस्थित था। जब चेलों ने थोमा को बताया कि उन्होंने प्रभु को देखा है, तो थोमा ने कहा कि जब तक वह यीशु के हाथों में कीलों के निशान और उनके पसली में अपना हाथ नहीं डालेगा, तब तक वह विश्वास नहीं करेगा। आठ दिन बाद, यीशु फिर प्रकट हुए। उन्होंने थोमा से कहा कि वह अपने हाथ के निशान देखे और विश्वास करे। थोमा ने तुरंत कहा:
“हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!”
(बाइबल पद: यूहन्ना 20:28)
3. महा आदेश (The Great Commission)
यीशु ने अपने चेलों को गलील के एक पहाड़ पर बुलाया और उन्हें एक महान कार्य सौंपा। यह कार्य आज भी मसीही विश्वास का आधार है:
“इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ, और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ। और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूँ।”
(बाइबल पद: मत्ती 28:19-20)
4. स्वर्गारोहण (The Ascension)
पुनरुत्थान के चालीस दिन बाद, यीशु ने अपने चेलों को यरूशलेम के निकट जैतून के पहाड़ पर एकत्र किया। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया कि वे यरूशलेम में ठहरें और पवित्र आत्मा के आने की प्रतीक्षा करें।
जब यीशु उनसे बात कर रहे थे, तो वे उनकी ओर देखते रहे और यीशु ऊँचे उठाए गए, और एक बादल ने उन्हें उनकी आँखों से ओझल कर दिया।
“…और यह कहकर, वह उनके देखते-देखते ऊपर उठा लिया गया, और बादल ने आकर उसे उनकी आँखों से छिपा लिया।”
(बाइबल पद: प्रेरितों के काम 1:9)
जब वे आसमान की ओर देख रहे थे, तो दो पुरुष, श्वेत वस्त्र पहने हुए, उनके पास खड़े हुए और बोले:
“हे गलीली पुरुषों, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर ताक रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है, उसी रीति से वह फिर आएगा।”
(बाइबल पद: प्रेरितों के काम 1:11)
इस प्रकार, यीशु मसीह ने अपनी सेवकाई पूरी की और पिता के पास वापस चले गए, यह वादा छोड़कर कि वह पवित्र आत्मा को भेजेंगे और एक दिन महिमा के साथ फिर से लौटेंगे।
