यह घटना मसीह का प्रलोभन (यानी, परीक्षा) के रूप में जानी जाती है, जो मत्ती (4:1-11) और लूका (4:1-13) के सुसमाचारों में वर्णित है। यह शैतान द्वारा यीशु को दी गई तीन परीक्षाओं की एक श्रृंखला है ।
पृष्ठभूमि
यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा यीशु को बपतिस्मा दिए जाने के बाद, पवित्र आत्मा उन्हें जंगल (मरुस्थल) में ले गया ताकि शैतान द्वारा उनकी परीक्षा ली जा सके। यीशु ने चालीस दिन और चालीस रात तक उपवास किया। इस अवधि के अंत में, उन्हें बहुत तेज भूख लगी।
तीन प्रलोभन (परीक्षाएँ)
शैतान, जिसे अक्सर “परीक्षा लेने वाला” कहा जाता है, तीन चुनौतियों के साथ यीशु के पास आया:
1. शरीर का प्रलोभन (देह की वासना)
शैतान की चुनौती: शैतान ने रेगिस्तान के पत्थरों की ओर इशारा किया और कहा, “यदि आप परमेश्वर के पुत्र हैं, तो इन पत्थरों को रोटी बनने का आदेश दें।” यह यीशु को अपनी तत्काल, तीव्र शारीरिक भूख को संतुष्ट करने के लिए अपनी दिव्य शक्ति का व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग करने की चुनौती थी।
यीशु का उत्तर: यीशु ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने से इनकार कर दिया और धर्मग्रंथ (व्यवस्थाविवरण 8:3 से) का हवाला देते हुए जवाब दिया, “लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा।'”
2. अहंकार/प्रदर्शन का प्रलोभन (जीवन का घमंड)
शैतान की चुनौती: तब शैतान यीशु को यरूशलेम ले गया और उन्हें मंदिर के उच्चतम बिंदु (शिखर) पर खड़ा कर दिया। उसने यीशु को स्वयं को नीचे फेंकने की चुनौती दी, और यह सुझाव देने के लिए धर्मग्रंथ (भजन संहिता 91:11-12) का हवाला दिया कि परमेश्वर के स्वर्गदूत उन्हें पकड़ लेंगे, जिससे वे अपनी पहचान साबित करने के लिए एक शानदार चमत्कार करेंगे।
यीशु का उत्तर: यीशु ने परमेश्वर को आज़माने या उनकी सुरक्षा को परखने के विचार को अस्वीकार कर दिया, और फिर से धर्मग्रंथ (व्यवस्थाविवरण 6:16 से) के साथ जवाब दिया, “तुम प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न लेना।”
3. सांसारिक शक्ति का प्रलोभन (आँखों की वासना)
शैतान की चुनौती: अंत में, शैतान यीशु को एक बहुत ऊँचे पर्वत पर ले गया और उन्हें क्षण भर में दुनिया के सभी राज्य और उनका वैभव दिखाया। शैतान ने यह सब अधिकार और महिमा यीशु को देने की पेशकश की, यह कहते हुए, “यह सब मैं तुझे दे दूँगा, यदि तू गिरकर मुझे दण्डवत् करे।” यह क्रूस के दुख के बिना अपने मसीहाई राजत्व को प्राप्त करने का एक प्रलोभन था।
यीशु का उत्तर: यीशु ने दृढ़ता से शैतान को दूर जाने की आज्ञा दी, और केवल परमेश्वर के प्रति अपनी निष्ठा की पुष्टि की। उन्होंने अंतिम बार धर्मग्रंथ (व्यवस्थाविवरण 6:13 से) का हवाला दिया, यह कहते हुए, “हे शैतान, दूर हो जा! क्योंकि लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम करना, और केवल उसी की सेवा करना।'”
निष्कर्ष
जब शैतान सभी परीक्षाओं को समाप्त कर चुका, तो वह यीशु को छोड़कर चला गया, और स्वर्गदूत आए और उनकी सेवा करने लगे (उन्हें भोजन और देखभाल प्रदान की)। बाइबिल बताती है कि शैतान “एक उपयुक्त समय तक के लिए उनसे दूर रहा” (लूका 4:13), यह दर्शाता है कि यीशु की परीक्षाएँ उनके पूरे प्रचार कार्य के दौरान जारी रहेंगी।
इस कथा में, यीशु ने परमेश्वर के वचन पर पूर्ण आज्ञाकारिता और निर्भरता प्रदर्शित की, और मनुष्य के लिए सामान्य सभी तीन क्षेत्रों की परीक्षाओं पर विजय प्राप्त की: शारीरिक संतुष्टि की इच्छा, सांसारिक मान्यता की इच्छा, और सांसारिक शक्ति की इच्छा।
