बहुत समय पहले, अब्राहम नाम का एक व्यक्ति था। वह परमेश्वर पर बहुत विश्वास करता था। जब उसका बेटा इसहाक बड़ा हुआ, तो अब्राहम चाहता था कि उसके लिए एक अच्छी और परमेश्वर से डरने वाली पत्नी मिले।
इसलिए उसने अपने एक सेवक को कहा –
“तू मेरे बेटे इसहाक के लिए मेरे देश और रिश्तेदारों के बीच से एक पत्नी ढूंढकर ला।”
सेवक ऊँट लेकर लंबी यात्रा पर निकला और एक कुएँ के पास पहुँचा। वहाँ उसने परमेश्वर से प्रार्थना की –
“हे प्रभु, कृपया मेरी सहायता कर। जब कोई लड़की मुझसे और मेरे ऊँटों को पानी पिलाएगी, वही इसहाक के लिए पत्नी होगी।”
💧 दयालु रेबेका
थोड़ी देर बाद, एक सुंदर और विनम्र लड़की रेबेका पानी का घड़ा लेकर आई।
सेवक ने कहा – “क्या तुम मुझे थोड़ा पानी पिला सकती हो?”
रेबेका मुस्कुराई और बोली –
“ज़रूर! और मैं तुम्हारे ऊँटों को भी पानी पिलाऊँगी।”
वह बार-बार कुएँ से पानी खींचती रही, जब तक ऊँट तृप्त नहीं हो गए।
सेवक यह देखकर बहुत खुश हुआ। उसे समझ आ गया कि यह वही लड़की है जिसे परमेश्वर ने चुना है।
🏡 नई जगह, नया जीवन
सेवक रेबेका के घर गया और सब कुछ बताया। रेबेका का परिवार भी बहुत प्रसन्न हुआ।
जब उनसे पूछा गया, “क्या तुम इस व्यक्ति के साथ जाओगी?”
रेबेका ने तुरंत कहा –
“हाँ, मैं जाऊँगी!”
वह अपने परिवार को छोड़कर परमेश्वर की योजना पर भरोसा करके कनान देश चली गई।
❤️ इसहाक और रेबेका का मिलन
जब रेबेका ऊँटों पर बैठी आ रही थी, दूर से इसहाक ने उसे देखा।
रेबेका ने भी देखा और वह थोड़ा संकोच में घूँघट ओढ़ ली।
दोनों मिले, और इसहाक ने उससे बहुत प्रेम किया।
बाइबल कहती है –
“इसहाक ने रिबका से प्रेम किया, और वह उसके लिए सांत्वना बनी।”
👶 परमेश्वर का आशीर्वाद
कई साल बाद, जब उनके बच्चे नहीं हो रहे थे, इसहाक ने परमेश्वर से प्रार्थना की।
परमेश्वर ने उसकी सुन ली और रेबेका को दो जुड़वाँ बेटे हुए — एसाव और याकूब।
रेबेका को परमेश्वर ने बताया कि उसके दोनों बेटे दो अलग-अलग जातियाँ बनेंगे, और छोटा बड़ा पर अधिकार करेगा।
🌟 सीख
रेबेका की कहानी हमें यह सिखाती है:
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दयालु बनो – जैसे रिबका ने अजनबी की मदद की।
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विश्वास रखो – जैसे उसने बिना डरे नया रास्ता चुना।
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परमेश्वर से पूछो – जैसे रिबका ने गर्भ में संघर्ष होने पर प्रभु से पूछा।
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परिवार में प्रेम रखो – जैसे इसहाक और रिबका ने एक-दूसरे से किया।
🎵 बच्चों के लिए पद (मेमोरी वर्स):
“मैं तेरे मार्गों पर चलूँगी, क्योंकि तू मेरे हृदय को स्थिर करता है।”
— भजन संहिता 119:32
