बाइबल (पवित्रशास्त्र) में “फ़राऊन” (Pharaoh) किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह प्राचीन मिस्र के राजाओं को दिया जाने वाला एक पद या उपाधि है। बाइबिल में कई फ़राऊनों का उल्लेख है, जो अलग-अलग समय पर हुए।
फ़राऊन और उसके वंश से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण कहानियाँ बाइबिल की पहली दो किताबों उत्पत्ति (Genesis) और निर्गमन (Exodus) में मिलती हैं।
1. युसुफ (Joseph) के समय का फ़राऊन (उत्पत्ति की पुस्तक)
युसुफ, जो याकूब (इस्राएल) के बेटों में से एक था, उसे उसके भाइयों ने ईर्ष्यावश मिस्र में गुलामी के लिए बेच दिया था। समय के साथ, परमेश्वर की कृपा से युसुफ मिस्र के राजा फ़राऊन के सामने लाया गया।
फ़राऊन से भेंट: युसुफ ने फ़राऊन के दो रहस्यमय सपनों (सात मोटी गायें और सात पतली गायें; सात भरी बालें और सात सूखी बालें) का सही अर्थ बताया। युसुफ ने बताया कि इसका मतलब है कि मिस्र में पहले सात वर्ष बहुतायत के होंगे, जिसके बाद सात वर्ष का भयंकर अकाल पड़ेगा।
युसुफ की पदोन्नति: फ़राऊन, युसुफ की बुद्धिमत्ता से प्रभावित हुआ और उसने उसे मिस्र के पूरे देश पर अधिकारी (वायसराय या प्रधानमंत्री जैसा) बना दिया।
उत्पत्ति 41:41 में लिखा है, “फिर फ़राऊन ने युसुफ से कहा, ‘सुन, मैं तुझ को मिस्र के सारे देश के ऊपर अधिकारी ठहरा देता हूँ।'”
इस्राएलियों का आगमन: युसुफ ने बहुतायत के वर्षों में अन्न जमा किया, जिससे अकाल के वर्षों में मिस्र और आसपास के लोग बच सके। अकाल के कारण युसुफ का परिवार (याकूब और उसके बेटे) भी कनान से मिस्र आ गए और गोशेन प्रदेश में बस गए। इस समय फ़राऊन ने युसुफ के परिवार का स्वागत किया और उन्हें मिस्र की सबसे अच्छी भूमि दी।
वंश या शासन: यह एक ऐसा वंश था जिसने इस्राएलियों के साथ अच्छा व्यवहार किया और उन्हें मिस्र में आश्रय दिया।
2. मूसा (Moses) के समय का अत्याचारी फ़राऊन (निर्गमन की पुस्तक)
कई पीढ़ियों के बाद, मिस्र में एक नया राजवंश (या नया राजा) उठा, जो युसुफ को नहीं जानता था और इस्राएलियों से डरने लगा।
इस्राएलियों पर अत्याचार: इस नए फ़राऊन ने देखा कि इस्राएली (जो अब एक बड़ी जनसंख्या बन चुके थे) बहुत बढ़ रहे हैं। डर के मारे, उसने उन्हें गुलाम बना लिया और उनसे कठोर दासता करवाई।
मूसा का जन्म: इसी अत्याचार के दौरान मूसा का जन्म हुआ। फ़राऊन ने आदेश दिया था कि सभी नवजात इब्री (इस्राएली) लड़कों को नील नदी में फेंक दिया जाए। मूसा को उसकी माँ ने एक टोकरी में रखकर नदी में बहा दिया, जिसे संयोगवश फ़राऊन की बेटी ने पाया और उसका पालन-पोषण किया।
परमेश्वर का संदेश: मूसा बड़ा होकर अपने लोगों को मिस्र की गुलामी से मुक्त कराने के लिए परमेश्वर द्वारा चुना गया। परमेश्वर ने मूसा को फ़राऊन के पास भेजा और कहा कि वह उसके लोगों को “जाने दे” (अर्थात उन्हें मिस्र छोड़ने दे)।
फ़राऊन का हृदय कठोर होना: बाइबिल के अनुसार, फ़राऊन ने बार-बार इस्राएलियों को जाने देने से मना कर दिया। हर बार जब फ़राऊन इनकार करता था, तब परमेश्वर मिस्र पर एक भयंकर विपत्ति (जिसे “प्लेग” या महामारी कहा जाता है) भेजते थे। कुल दस विपत्तियाँ आईं (जैसे रक्त, मेंढक, जूँ, मक्खियाँ, पशुओं की महामारी, फोड़े, ओले, टिड्डियाँ, अंधकार)।
बाइबिल में स्पष्ट है कि परमेश्वर ने ही फ़राऊन के हृदय को कठोर किया ताकि परमेश्वर अपनी शक्ति दिखा सकें।
दसवीं विपत्ति (पहलोठों का नाश): यह सबसे भयानक विपत्ति थी। परमेश्वर ने मिस्र के हर घर में, यहाँ तक कि फ़राऊन के घर में भी, पहला बेटा (पहलोठा) मार डाला। इस विपत्ति के बाद, फ़राऊन डर गया और उसने इस्राएलियों को मिस्र छोड़ने की अनुमति दे दी।
फ़राऊन का नाश: जैसे ही इस्राएली गए, फ़राऊन को फिर से पछतावा हुआ और उसने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया। जब इस्राएली लाल सागर (Red Sea) पार कर रहे थे, फ़राऊन और उसकी सेना भी समुद्र में घुस गई। परमेश्वर ने पानी को वापस मोड़ दिया, और फ़राऊन तथा उसके सभी सैनिक समुद्र में डूब गए।
वंश या शासन: यह एक अत्याचारी शासन था जिसने परमेश्वर के लोगों का विरोध किया और अंत में परमेश्वर के न्याय से नाश हो गया। इस फ़राऊन के बाद, मिस्र के राजवंश को एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा।
💡 मुख्य शिक्षा
बाइबिल में फ़राऊन की कहानी परमेश्वर की संप्रभुता (सर्वोच्च शक्ति) को दर्शाती है। यह दिखाती है कि चाहे पृथ्वी का कोई भी शासक कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह परमेश्वर की इच्छा को नहीं रोक सकता। फ़राऊन का घमंड और परमेश्वर के लोगों पर उसका अत्याचार अंततः उसके और उसके वंश के विनाश का कारण बना, जबकि परमेश्वर ने अपने लोगों को सुरक्षित निकाला।

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