सदोम और अमोरा का विनाश (बाइबिल के अनुसार)

The Story of the Destruction of Sadom and Amorrah

सदोम और अमोरा का विनाश (बाइबिल के अनुसार)

सदोम (Sodom) और अमोरा (Gomorrah) दो ऐसे शहर थे जो जॉर्डन घाटी में स्थित थे। बाइबिल के अनुसार, ये शहर अपनी अत्यधिक दुष्टता और अनैतिकता के लिए प्रसिद्ध थे, और उनके निवासियों के पापों की आवाज़ परमेश्वर तक पहुँच चुकी थी।

अब्राहम की मध्यस्थता

परमेश्वर ने अपने सेवक अब्राहम (Abraham) को शहरों के विनाश के अपने इरादे के बारे में बताया। अब्राहम का भतीजा लूत (Lot) सदोम शहर में रहता था। अब्राहम ने परमेश्वर से विनती की। उसने पूछा, “क्या आप उस शहर को नष्ट कर देंगे, भले ही उसमें पचास धर्मी (धार्मिक) लोग हों?”

परमेश्वर सहमत हुए, “यदि मुझे सदोम शहर में पचास धर्मी मिलेंगे, तो मैं उन सबके निमित्त उस स्थान को छोड़ दूँगा।”

अब्राहम बार-बार विनती करता रहा और संख्या को कम करता गया—पचास से पैंतालीस, पैंतालीस से चालीस, चालीस से तीस, तीस से बीस, और अंत में केवल दस। परमेश्वर ने हर बार सहमति दी कि यदि उन्हें केवल दस धर्मी लोग भी मिल जाएँगे, तो वह शहर को नहीं नष्ट करेंगे। दस धर्मी लोगों की तलाश के लिए परमेश्वर की ओर से दो स्वर्गदूत (Angels) सदोम शहर की ओर रवाना हुए।

लूत का घर और सदोम के पुरुष

शाम को, दोनों स्वर्गदूत सदोम पहुँचे, और लूत उन्हें शहर के फाटक पर मिला। लूत परमेश्वर से डरने वाला व्यक्ति था, और उसने तुरंत उन अजनबियों को अपने घर में रात बिताने का न्योता दिया ताकि वह उनकी रक्षा कर सके।

स्वर्गदूतों के सोने से पहले, शहर के सारे पुरुष—जवान से लेकर बूढ़े तक—लूत के घर को चारों ओर से घेर लिया। उन्होंने लूत से चिल्लाकर कहा, “वे पुरुष कहाँ हैं जो रात को तेरे यहाँ आए हैं? उन्हें बाहर निकाल, ताकि हम उन्हें ‘जानें’।” (बाइबिल में यहाँ “जानें” शब्द का अर्थ उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए किया गया है, जो उनकी चरम अनैतिकता और समलैंगिकता को दर्शाता है)।

लूत ने उनसे विनती की और अपने मेहमानों को बचाने की कोशिश में, उसने यहाँ तक कह दिया कि वह अपनी दो बेटियों को पुरुषों को सौंप देगा, लेकिन उसने स्वर्गदूतों को छूने से मना किया क्योंकि वे उसकी छत के नीचे आए थे। लेकिन सदोम के पुरुषों ने उसकी बात नहीं मानी और दरवाज़ा तोड़ने लगे।

तब स्वर्गदूतों ने अपना हाथ बढ़ाया, लूत को अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया। बाहर खड़े सभी पुरुषों को उन्होंने अंधा कर दिया, जिससे वे दरवाज़े को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते थक गए।

शहर से पलायन

स्वर्गदूतों ने लूत को बताया कि परमेश्वर इस शहर को नष्ट करने वाले हैं, क्योंकि इसके पाप बहुत अधिक हैं, और वहाँ दस धर्मी लोग भी नहीं मिले। उन्होंने लूत से कहा कि वह अपने सभी रिश्तेदारों—पुत्रों, पुत्रियों और दामादों को लेकर तुरंत शहर छोड़कर भाग जाए।

लूत ने अपने दामादों को यह बात बताई, पर उन्होंने सोचा कि लूत मज़ाक कर रहा है और उन्होंने जाने से मना कर दिया।

जब सुबह हुई, तो स्वर्गदूतों ने लूत से जल्दी करने को कहा। जब लूत ने देरी की, तो परमेश्वर की दया के कारण, स्वर्गदूतों ने लूत, उसकी पत्नी और उसकी दो बेटियों को हाथ से पकड़कर शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर खींच लिया।

स्वर्गदूतों ने उन्हें चेतावनी दी, “अपनी जान लेकर भाग जा; न पीछे मुड़कर देखना, और न इस पूरे मैदान में कहीं रुकना। उस पहाड़ पर भाग जा, नहीं तो तू भी मारा जाएगा।”

लूत ने पास के एक छोटे से नगर सोअर (Zoar) में शरण लेने की अनुमति माँगी, और परमेश्वर ने उसे यह अनुमति दे दी।

विनाश और नमक का खंभा

जैसे ही लूत और उसके परिवार ने सोअर में प्रवेश किया, परमेश्वर ने सदोम और अमोरा पर आकाश से आग और गंधक (Sulfur) की वर्षा की। यह दोनों शहर और उनके आस-पास का सारा मैदान, सब कुछ नष्ट हो गया।

भागते समय, लूत की पत्नी ने स्वर्गदूतों की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया और पीछे मुड़कर देखा कि शहर कैसे जल रहे हैं। बाइबिल के अनुसार, इस अवज्ञा के कारण वह तुरंत वहीं नमक का खंभा (Pillar of Salt) बन गई।

अगली सुबह, अब्राहम उसी जगह गया जहाँ वह परमेश्वर के सामने खड़ा था, और उसने देखा कि उस पूरे मैदान में से धुएँ का गुबार ऐसे उठ रहा था, जैसे भट्ठी से उठता है। इस प्रकार सदोम और अमोरा, अपनी दुष्टता के कारण, परमेश्वर के न्याय से नष्ट हो गए।

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