येसु का येरूसलेम में विजयी प्रवेश

Jesus’ triumphal entry into Jerusalem

पृष्ठभूमि

येसु मसीह अपनी सेवकाई के अंतिम चरण में थे और फसह पर्व से कुछ ही दिन पहले वह येरूसलेम जा रहे थे। इस यात्रा का उद्देश्य परमेश्वर की उस योजना को पूरा करना था जिसके तहत उन्हें मानवजाति के पापों के प्रायश्चित के लिए क्रूस पर बलिदान होना था। यरीहो से यात्रा करते हुए, वे जैतून पहाड़ (Mount of Olives) के पास, बैतफगे और बैतनिय्याह के गाँवों तक पहुँचे।

गधे के बच्चे की व्यवस्था

येसु ने अपने शिष्यों में से दो को यह कहकर आगे भेजा:

“सामने के गाँव में जाओ, और वहाँ पहुँचते ही तुम्हें एक गदही का बच्चा बँधा हुआ मिलेगा, जिस पर कभी कोई नहीं बैठा। उसे खोलकर मेरे पास ले आओ। यदि कोई तुमसे पूछे कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तो कहना कि ‘प्रभु को इसकी आवश्यकता है’ (या ‘प्रभु को इसका प्रयोजन है’)। तब वह तुरन्त उसे भेज देगा।” (मरकुस $11:2-3$ का सारांश)

शिष्यों ने वैसा ही किया। वे उस गाँव में पहुँचे और उन्हें वह गधा मिला जैसा येसु ने कहा था। जब वे उसे खोल रहे थे, तो कुछ लोगों ने उनसे पूछा, और उन्होंने येसु का संदेश दिया। लोगों ने उन्हें गधा ले जाने दिया।

भविष्यवाणी का पूरा होना

शिष्यों ने गधे को येसु के पास लाकर उस पर अपने वस्त्र बिछाए, और येसु उस पर बैठ गए। इस प्रकार, उन्होंने पुराने नियम के भविष्यवक्ता जकर्याह की भविष्यवाणी को पूरा किया, जिसमें लिखा था:

“हे सिय्योन की पुत्री, बहुत प्रसन्न हो! हे येरूसलेम की पुत्री, जयजयकार कर! देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह धर्मी है और उद्धार करता है; वह दीन है और गधे पर, हाँ, गधी के बच्चे पर चढ़ा हुआ आता है।” (जकर्याह $9:9$)

यह सवारी एक विनम्र राजा का प्रतीक थी, जो शांति और दीनता के साथ आ रहा था, न कि किसी युद्धप्रिय राजा की तरह घोड़े पर।

लोगों की प्रतिक्रिया और जयजयकार

जब येसु येरूसलेम के निकट पहुँचे, तो एक बहुत बड़ी भीड़ उनके साथ हो ली। लोगों ने उन्हें राजा और मसीहा के रूप में पहचान कर उनका भव्य स्वागत किया:

  1. वस्त्र बिछाना: भीड़ में से अधिकतर लोगों ने अपने वस्त्र उतारकर सड़क पर बिछा दिए।

  2. खजूर की डालियाँ: अन्य लोगों ने पेड़ों से डालियाँ (विशेषकर खजूर की डालियाँ) काटकर रास्ते पर बिछाईं।

  3. जयजयकार: लोग ऊँची आवाज़ में पुकार रहे थे:

    “होशाना! धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है! धन्य है हमारे पिता दाऊद का आने वाला राज्य! होशाना स्वर्ग में!”

“होशाना” का अर्थ है “बचाओ” या “हम विनती करते हैं, बचाओ!” इस जयजयकार से पता चलता है कि लोग येसु को अपने उद्धारकर्ता और दाऊद के वंश का राजा मान रहे थे, जो आकर उन्हें रोमी शासन से मुक्त करेगा।

येरूसलेम में हलचल

जब येसु येरूसलेम में दाखिल हुए, तो पूरा नगर हिल उठा। लोगों ने पूछा, “यह कौन है?”

भीड़ ने उत्तर दिया, “यह गलील के नासरत का भविष्यवक्ता येसु है।” (मत्ती $21:10-11$)

इस घटना ने येसु के जीवन के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सप्ताह की शुरुआत की, जो उन्हें क्रूस की ओर ले गया। यह पाम संडे (खजूर रविवार) के रूप में मनाया जाता है, जो येसु के राजा के रूप में किए गए प्रवेश और उनके बलिदान की तैयारी को याद दिलाता है।

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बाइबिल के अनुसार येसु के येरूसलेम में विजयी प्रवेश (Triumphal Entry into Jerusalem) की कहानी हिंदी में तैयार करूँगा। इस घटना को ‘खजूर रविवार’ (Palm Sunday) के रूप में भी जाना जाता है और यह येसु के दुःख-भोग और पुनरुत्थान के पवित्र सप्ताह की शुरुआत थी।

यह कहानी मत्ती 21:1-11, मरकुस 11:1-11, लूका 19:28-44 और यूहन्ना 12:12-19 में पाई जाती है।

 

 

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