कर वसूलने वाला ज़क्कई का उद्धार की कहानी

The Story of the Salvation of Zacchaeus the Tax Collector

प्राचीन यहूदिया में, लोग चुंगी वसूलने वालों (Tax Collectors) से घृणा करते थे। उन्हें पापी और देशद्रोही माना जाता था, क्योंकि वे रोमी सरकार के लिए काम करते थे और अक्सर लोगों से अधिक पैसे वसूल कर खुद अमीर बन जाते थे।

जेरिको नामक शहर में ज़क्कई नाम का एक चुंगी लेने वाला मुखिया रहता था। वह कद में छोटा था, लेकिन उसकी दौलत बहुत बड़ी थी। हर कोई उसे लालची और बेईमान कहता था। ज़क्कई जानता था कि लोग उसे नापसंद करते हैं, पर दौलत के मोह में उसने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को दबा दिया था।

एक दिन ज़क्कई ने सुना कि यीशु मसीह (Jesus Christ) उसके शहर में आए हैं। यीशु के प्रेम और दया की कहानियाँ सुनकर, ज़क्कई के मन में उन्हें देखने की तीव्र इच्छा जागी। जब यीशु भीड़ के साथ उसके पास से गुज़र रहे थे, तो ज़क्कई छोटे कद के कारण उन्हें देख नहीं पा रहा था।

लेकिन, यीशु को देखने की उसकी चाहत इतनी प्रबल थी कि उसने अपने पद की परवाह किए बिना दौड़कर आगे गया और एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया। वह बस एक झलक पाना चाहता था, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

यीशु जब उस स्थान पर पहुँचे, तो उन्होंने ऊपर देखा और ज़क्कई से कहा, “ज़क्कई, झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में ठहरना है।” (लूका 19:5)

यीशु के मुख से अपना नाम सुनकर ज़क्कई हैरान रह गया। वह तुरंत नीचे उतर आया और बड़े आनंद से यीशु को अपने घर ले गया।

यह देखकर भीड़ में लोग कुड़कुड़ाने लगे, “यह तो एक पापी मनुष्य के यहाँ जा ठहरा है।” वे विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि परमेश्वर का पुत्र एक ऐसे व्यक्ति के घर जा रहा है, जिसे समाज ने बहिष्कृत कर दिया था।

यीशु के प्रेम और दया से ज़क्कई का हृदय पिघल गया। उसने खड़े होकर प्रभु से कहा, “हे प्रभु, देखो, मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूँ, और यदि मैंने किसी का कुछ छल से ले लिया है, तो उसे चौगुना फेर देता हूँ।” (लूका 19:8)

ज़क्कई का पश्चाताप सच्चा था। उसने न केवल अपनी गलतियों को स्वीकार किया, बल्कि सक्रिय रूप से उनकी भरपाई करने का भी संकल्प लिया।

तब यीशु ने उससे कहा, “आज इस घर में उद्धार आया है, क्योंकि यह भी इब्राहीम का पुत्र है। क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूँढ़ने और बचाने आया है।” (लूका 19:9-10)

इस प्रकार, चुंगी वसूलने वाले ज़क्कई ने न केवल अपनी दौलत को सही किया, बल्कि उसे उद्धार भी मिला। उसकी कहानी यह सिखाती है कि परमेश्वर किसी के भी अतीत को नहीं देखते, बल्कि पश्चाताप करने वाले हर हृदय को क्षमा करने और स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं।

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