यह घटना मसीह का प्रलोभन (यानी, परीक्षा) के रूप में जानी जाती है, जो मत्ती (4:1-11) और लूका (4:1-13) के सुसमाचारों में वर्णित है। यह शैतान द्वारा यीशु को दी गई तीन परीक्षाओं की एक श्रृंखला है । पृष्ठभूमि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा यीशु को बपतिस्मा दिए जाने के बाद, पवित्र आत्मा उन्हें … Continue reading “The Temptation of Jesus”
इफिसियों पत्री (६:२-३) में, वह लिखते हैं: “‘अपने पिता और अपनी माता का आदर कर’—यह पहली आज्ञा है जिसके साथ प्रतिज्ञा भी है—‘कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।” मेरे भाइयों और बहनों, मित्रों, और इस सांसारिक यात्रा के सहयात्रियों, आइए आज हम अपने हृदयों और मनों को एक ऐसी … Continue reading “Honor your father and mother—this is the first commandment with a promise”
पृष्ठभूमि येसु मसीह अपनी सेवकाई के अंतिम चरण में थे और फसह पर्व से कुछ ही दिन पहले वह येरूसलेम जा रहे थे। इस यात्रा का उद्देश्य परमेश्वर की उस योजना को पूरा करना था जिसके तहत उन्हें मानवजाति के पापों के प्रायश्चित के लिए क्रूस पर बलिदान होना था। यरीहो से यात्रा करते हुए, … Continue reading “Jesus’ triumphal entry into Jerusalem”
यह कहानी उस समय की है जब परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों, इस्राएलियों (Israelites) को मिस्र की दासता से मुक्त किया था। मूसा को परमेश्वर ने उनके अगुवे के रूप में चुना था। मूसा के नेतृत्व में, इस्राएलियों ने लाल समुद्र पार किया और मिस्र के फ़िरौन (Pharaoh) के चंगुल से बचकर स्वतंत्रता की … Continue reading “Moses and the Ten Commandments”
परिचय: यीशु का ‘प्रिय शिष्य’ बाइबिल में, यूहन्ना (Yuhanna) सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय प्रेरितों (Apostles) में से एक हैं। वह बारह शिष्यों में सबसे कम उम्र के थे और उन्हें अक्सर “वह शिष्य जिससे यीशु प्रेम करते थे” कहा जाता है। यूहन्ना अपने भाई याकूब (James) के साथ ज़ेबेदी (Zebedee) के पुत्र थे, और वे … Continue reading “John the Apostle”
