प्राचीन यहूदिया में, लोग चुंगी वसूलने वालों (Tax Collectors) से घृणा करते थे। उन्हें पापी और देशद्रोही माना जाता था, क्योंकि वे रोमी सरकार के लिए काम करते थे और अक्सर लोगों से अधिक पैसे वसूल कर खुद अमीर बन जाते थे। जेरिको नामक शहर में ज़क्कई नाम का एक चुंगी लेने वाला मुखिया रहता … Continue reading “The Story of the Salvation of Zacchaeus the Tax Collector”
क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो बल्कि अनन्त जीवन पाए।” (यूहन्ना 3:16) यह एक ऐसी कहानी है जो प्रेम की सबसे गहरी परिभाषा है—यह कहानी है परमेश्वर के अद्भुत प्रेम की। यह कोई राजा-रानी की … Continue reading “God’s Precious Love: A Wonderful Story”
यरूशलेम के बाहरी किनारों पर, एक प्राचीन अंजीर का पेड़ था। वह केवल लकड़ी और पत्तियों का ढेर नहीं था, बल्कि समय का गवाह था। उसने सुना था कि उसके पत्ते कितने महत्वपूर्ण थे, जब बहुत पहले, मनुष्य ने अपनी नग्नता को ढकने के लिए उन्हीं का सहारा लिया था। उत्पत्ति 3:7 में लिखा है: … Continue reading “The Story of the Fig Tree”
यह घटना मसीह का प्रलोभन (यानी, परीक्षा) के रूप में जानी जाती है, जो मत्ती (4:1-11) और लूका (4:1-13) के सुसमाचारों में वर्णित है। यह शैतान द्वारा यीशु को दी गई तीन परीक्षाओं की एक श्रृंखला है । पृष्ठभूमि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा यीशु को बपतिस्मा दिए जाने के बाद, पवित्र आत्मा उन्हें … Continue reading “The Temptation of Jesus”
इफिसियों पत्री (६:२-३) में, वह लिखते हैं: “‘अपने पिता और अपनी माता का आदर कर’—यह पहली आज्ञा है जिसके साथ प्रतिज्ञा भी है—‘कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।” मेरे भाइयों और बहनों, मित्रों, और इस सांसारिक यात्रा के सहयात्रियों, आइए आज हम अपने हृदयों और मनों को एक ऐसी … Continue reading “Honor your father and mother—this is the first commandment with a promise”
पृष्ठभूमि येसु मसीह अपनी सेवकाई के अंतिम चरण में थे और फसह पर्व से कुछ ही दिन पहले वह येरूसलेम जा रहे थे। इस यात्रा का उद्देश्य परमेश्वर की उस योजना को पूरा करना था जिसके तहत उन्हें मानवजाति के पापों के प्रायश्चित के लिए क्रूस पर बलिदान होना था। यरीहो से यात्रा करते हुए, … Continue reading “Jesus’ triumphal entry into Jerusalem”
यह कहानी उस समय की है जब परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों, इस्राएलियों (Israelites) को मिस्र की दासता से मुक्त किया था। मूसा को परमेश्वर ने उनके अगुवे के रूप में चुना था। मूसा के नेतृत्व में, इस्राएलियों ने लाल समुद्र पार किया और मिस्र के फ़िरौन (Pharaoh) के चंगुल से बचकर स्वतंत्रता की … Continue reading “Moses and the Ten Commandments”
जब येसु मसीह ने अपनी सेवकाई शुरू की, तो उन्होंने अपने मिशन को आगे बढ़ाने और लोगों को परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाने के लिए अपने शिष्यों में से बारह पुरुषों को चुना। इन्हें प्रेरित (Apostles) कहा गया। इन बारह लोगों को येसु ने अपने साथ रहने, प्रचार करने और दुष्ट आत्माओं को निकालने … Continue reading “The Twelve Disciples of Jesus”
परिचय: यीशु का ‘प्रिय शिष्य’ बाइबिल में, यूहन्ना (Yuhanna) सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय प्रेरितों (Apostles) में से एक हैं। वह बारह शिष्यों में सबसे कम उम्र के थे और उन्हें अक्सर “वह शिष्य जिससे यीशु प्रेम करते थे” कहा जाता है। यूहन्ना अपने भाई याकूब (James) के साथ ज़ेबेदी (Zebedee) के पुत्र थे, और वे … Continue reading “John the Apostle”
यीशु मसीह ने अपना पहला सार्वजनिक चमत्कार गलील के काना (Cana) नामक गाँव में एक विवाह समारोह के दौरान किया था। इस घटना का वर्णन यूहन्ना (John) रचित सुसमाचार, अध्याय 2, पद 1-11 में मिलता है। 📜 कहानी का सारांश 1. विवाह और समस्या तीसरे दिन, गलील के काना में एक … Continue reading “Jesus’ First Miracle: The Wedding Feast at Cana”
