
परमेश्वर प्रेम है” – नया नियम का मूल सत्य
नया नियम में सबसे स्पष्ट और शक्तिशाली घोषणा 1 यूहन्ना 4:7-21 में मिलती है। यह पूरा परिच्छेद परमेश्वर के प्रेम का हृदय है। आइए हम मूल शब्दों में सुनें और समझें।
प्रेरित यूहन्ना लिखते हैं: “हे प्रियो, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है। जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है।” (1 यूहन्ना 4:7-8)
देखिए, यहां प्रेम को परमेश्वर की प्रकृति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रेम परमेश्वर से आता है। जो प्रेम करता है, वह परमेश्वर का बच्चा है और परमेश्वर को जानता है। लेकिन जो प्रेम नहीं करता, वह परमेश्वर को जानता ही नहीं। यह कितना साफ और चुनौतीपूर्ण वचन है!
फिर वे आगे कहते हैं: “इस रीति से परमेश्वर का प्रेम हम में प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपना एकलौता पुत्र जगत में भेजा, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ। प्रेम इस में नहीं है कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया, परन्तु इस में है कि उसने हम से प्रेम किया, और हमारे पापों के प्रायश्चित्त के लिये अपना पुत्र भेज दिया।” (1 यूहन्ना 4:9-10)
यह प्रेम बिना शर्त का है। हमने पहले परमेश्वर से प्रेम नहीं किया – बल्कि उसने हमसे प्रेम किया। जब हम पाप में थे, तब भी उसने अपना एकलौता पुत्र भेज दिया।
“हम प्रेम करते हैं, क्योंकि उसने पहले हम से प्रेम किया।” (1 यूहन्ना 4:19)
हमारा प्रेम परमेश्वर के प्रेम का जवाब मात्र है।
और सबसे महत्वपूर्ण घोषणा: “और हम ने परमेश्वर के प्रेम को जान लिया, और उस पर विश्वास किया है। परमेश्वर प्रेम है; और जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है और परमेश्वर उसमें बना रहता है।” (1 यूहन्ना 4:16)
यह वाक्य दो बार “परमेश्वर प्रेम है” कहता है। जब हम प्रेम में बने रहते हैं, तब हम परमेश्वर में बने रहते हैं। यूहन्ना इस परिच्छेद को इस निष्कर्ष पर समाप्त करते हैं कि यदि कोई कहे “मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूँ” लेकिन अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है। क्योंकि जिसे हमने नहीं देखा, उससे प्रेम रखना तभी संभव है जब हम जिन्हें देखते हैं, उनसे प्रेम रखें।
प्रियजनो, 1 यूहन्ना 4:7-21 पूरे न्यू टेस्टामेंट का सबसे बड़ा “प्रेम का गीत” है। इसे बार-बार पढ़िए और मनन कीजिए।
यीशु मसीह के माध्यम से परमेश्वर का प्रेम
अब हम यीशु की शिक्षाओं की ओर आते हैं। सबसे प्रसिद्ध और मूल आयत है यूहन्ना 3:16:
“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।”
यह वचन जगत के हर व्यक्ति के लिए है। परमेश्वर का प्रेम इतना विशाल है कि उसने अपना एकमात्र पुत्र बलिदान कर दिया। यहां “ऐसा प्रेम” शब्द गहरा अर्थ रखता है – यह बलिदानी, अनंत और उद्धार करने वाला प्रेम है।
यीशु स्वयं कहते हैं: “इससे बढ़कर प्रेम किसी का भी नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।” (यूहन्ना 15:13)
और उन्होंने हमें आज्ञा दी: “जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।” (यूहन्ना 13:34)
यीशु का प्रेम शब्दों तक सीमित नहीं था। उन्होंने बीमारों को छुआ, पापियों को क्षमा किया, और अंत में क्रूस पर अपना प्राण दिया। जब हम यीशु को देखते हैं, तो हम परमेश्वर के प्रेम का जीवंत चित्र देखते हैं।
पौलुस और अन्य प्रेरितों के पत्रों में परमेश्वर का प्रेम
अब पौलुस के पत्रों की ओर चलते हैं। पौलुस, जो एक समय मसीह का विरोधी था, बाद में इस प्रेम का सबसे बड़ा घोषक बना।
रोमियों 5:8 में लिखा है: “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।”
ध्यान दीजिए – “जब हम पापी ही थे”। प्रेम का प्रमाण हमारे अच्छे होने पर नहीं, बल्कि हमारे पापी होने पर दिया गया।
इफिसियों 2:4-5: “परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)”
यह “बड़े प्रेम” शब्द हमें बताता है कि परमेश्वर का प्रेम कितना विशाल और दया से भरा है।
रोमियों 8:38-39 में पौलुस हमें सबसे बड़ा आश्वासन देते हैं: “क्योंकि मैं निश्चय जानता हूँ कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधान, न वर्तमान, न भविष्य, न शक्तियाँ, न ऊँचाई, न गहराई, और न कोई और सृष्टि, हमें हमारे प्रभु यीशु मसीह में जो परमेश्वर का प्रेम है, उससे अलग कर सकेगी।”
कोई भी शक्ति – न मृत्यु, न जीवन, न कोई समस्या, न कोई सृष्टि – हमें परमेश्वर के प्रेम से अलग नहीं कर सकती। यह आश्वासन जीवन की हर कठिनाई में हमें टिकाए रखता है।
1 यूहन्ना 3:1: “देखो, पिता ने हम पर कितना बड़ा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी।”
हम परमेश्वर के बच्चे हैं! यह अपनाने वाला, परिवार बनाने वाला प्रेम है।
अन्य पत्रों में भी यही स्वर है। तीतुस 3:4-5 में परमेश्वर की भलाई और प्रेम की भलाई प्रगट होती है। गलातियों 2:20 में पौलुस कहते हैं कि मसीह ने “मुझ से प्रेम रखा, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।”
इस प्रेम को जीवन में उतारना और समापन
प्रियजनो, नया नियम की इन सभी आयतों – 1 यूहन्ना 4 का पूरा परिच्छेद, यूहन्ना 3:16, रोमियों 5:8, इफिसियों 2:4-5, रोमियों 8:38-39, 1 यूहन्ना 3:1, यूहन्ना 15:13 और अन्य – का एक ही संदेश है: परमेश्वर प्रेम है। यह प्रेम अनंत, बलिदानी, क्षमाशील और हर स्थिति में हमारे साथ है।
1 कुरिन्थियों 13 में प्रेम की परिभाषा दी गई है – प्रेम धैर्यवान है, कृपालु है, डाह नहीं करता, कभी अंत नहीं होता। यीशु ने कहा: “जैसा मैंने तुमसे प्रेम किया, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।”
तो आज से हम यह प्रतिज्ञा करें कि हम इस प्रेम में बने रहेंगे, दूसरों से प्रेम करेंगे, क्षमा करेंगे और बलिदान देंगे।
हे प्रेम के स्रोत परमेश्वर, तूने हमें इतना बड़ा प्रेम दिखाया है। हमारे हृदय को अपने प्रेम से भर दे। हमें सिखा कि हम भी प्रेम करें – अपने परिवार में, पड़ोस में, यहां तक कि विरोधियों में भी। यीशु मसीह के पवित्र नाम में हम प्रार्थना करते हैं। आमीन।
परमेश्वर प्रेम है – और वह हमेशा, हमेशा हमारा प्रेम करेगा! 🙏
धन्यवाद।
God is Love
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