पाँच रोटी और दो मछलियों की कहानी

The Story of Five Loaves and Two Fishes

(मत्ती 14:13-21, मरकुस 6:30-44, लूका 9:10-17, यूहन्ना 6:1-14)

एक बार की बात है, जब यीशु मसीह ने गलील की झील के पार एक निर्जन (एकांत) स्थान पर विश्राम करने के लिए गए थे। मगर लोगों की एक बहुत बड़ी भीड़ भी उनके पीछे-पीछे आ गई, क्योंकि उन्होंने यीशु को बीमारों को चंगा करते हुए देखा था।

यीशु ने लोगों पर दया की, उन्हें परमेश्‍वर के राज्य के विषय में बहुत कुछ सिखाया और उनके बीमारों को चंगा किया। जैसे-जैसे शाम होने लगी, उनके चेले उनके पास आए और कहा, “यह जगह निर्जन है और दिन ढल चुका है। लोगों को यहाँ से विदा कीजिए, ताकि वे आसपास के गाँवों में जाकर अपने लिए खाने की चीज़ें मोल ले सकें।”

परन्तु यीशु ने चेलों से कहा, “इन्हें जाने की ज़रूरत नहीं है। तुम ही इन्हें खाने को दो।

चेले उलझन में पड़ गए। उन्होंने हिसाब लगाया कि इन पाँच हज़ार से अधिक लोगों को (स्त्रियों और बच्चों को छोड़कर) खिलाने के लिए उनके पास पर्याप्त धन नहीं है।

तब अन्द्रियास, जो शमौन पतरस का भाई था, यीशु से बोला, “यहां एक बालक है, जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं; परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?”

बाइबिल पद (Bible Verse) – यूहन्ना 6:9

“यहां एक बालक है, जिसके पास जौ की पाँच रोटी और दो मछलियाँ हैं; परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?”

यीशु ने कहा, “लोगों को बिठा दो।” उस जगह बहुत हरी घास थी। उन्होंने चेलों से कहा कि वे लोगों को पचास-पचास के समूह में बिठा दें।

यीशु ने वे पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ अपने हाथों में लीं, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद की प्रार्थना की। प्रार्थना करने के बाद, उन्होंने रोटियाँ तोड़कर चेलों को दीं, और चेलों ने लोगों को बाँटा। मछलियाँ भी इसी तरह से बाँटी गईं।

बाइबिल पद (Bible Verse) – यूहन्ना 6:11

“तब यीशु ने रोटियाँ लीं और धन्यवाद करके, बैठे हुए लोगों को बाँटीं, और वैसे ही मछलियाँ भी जितनी वे चाहते थे।”

सब लोगों ने जी भरकर खाया और तृप्त हो गए। जब सब खा चुके, तो यीशु ने अपने चेलों से कहा, “बचे हुए टुकड़ों को इकट्ठा कर लो, ताकि कुछ भी व्यर्थ न जाए।”

जब चेलों ने टुकड़ों को इकट्ठा किया, तो उन्होंने बारह टोकरियाँ भरकर रोटी और मछली के बचे हुए टुकड़े पाए! इस चमत्कार में स्त्रियों और बच्चों को छोड़कर, पाँच हज़ार पुरुषों ने भोजन किया था।

यह कहानी हमें सिखाती है कि जब हम अपना छोटा सा भी संसाधन यीशु मसीह के हाथों में सौंप देते हैं, तो वह हमारी अपेक्षा से कहीं अधिक प्रदान कर सकता है।

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