The Conclusion of Revelation: The Final Victory of the King of Kings

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक, जो प्रेरित यूहन्ना को दर्शन में दी गई थी, निराशा या विनाश पर समाप्त नहीं होती, बल्कि यह एक महान, विजयी निष्कर्ष पर पहुँचती है। यह पृथ्वी पर बुराई के अंतिम अंत, परमेश्वर के लोगों के उद्धार, और अनंत काल के आगमन का वर्णन करती है। 1. राजाओं के राजा की विजय … Continue reading “The Conclusion of Revelation: The Final Victory of the King of Kings”

The Story of Five Loaves and Two Fishes

(मत्ती 14:13-21, मरकुस 6:30-44, लूका 9:10-17, यूहन्ना 6:1-14) एक बार की बात है, जब यीशु मसीह ने गलील की झील के पार एक निर्जन (एकांत) स्थान पर विश्राम करने के लिए गए थे। मगर लोगों की एक बहुत बड़ी भीड़ भी उनके पीछे-पीछे आ गई, क्योंकि उन्होंने यीशु को बीमारों को चंगा करते हुए देखा … Continue reading “The Story of Five Loaves and Two Fishes”

The Story of a Good Neighbor: The Parable of the Good Samaritan (Luke 10:25-37)

यह कहानी यीशु ने एक व्यवस्थापक को जवाब देते हुए सुनाई थी, जिसने यीशु से पूछा था कि वह अनन्त जीवन का वारिस होने के लिए क्या करे। यीशु ने जवाब में उसे परमेश्वर के नियम याद दिलाए कि वह परमेश्वर से और अपने पड़ोसी से प्रेम करे। तब व्यवस्थापक ने यीशु से यह सवाल … Continue reading “The Story of a Good Neighbor: The Parable of the Good Samaritan (Luke 10:25-37)”

The Story of Lazarus: The Miracle of Resurrection

लाजरुस की कहानी शायद यीशु के चमत्कारों में सबसे गहरी है, जो जीवन और मृत्यु पर उनकी शक्ति का एक गतिशील प्रदर्शन है और उनके स्वयं के पुनरुत्थान की एक पूर्व सूचना है। यह यूहन्ना के सुसमाचार, अध्याय 11 में दर्ज है। 1. प्रिय मित्र और अत्यावश्यक बुलावा लाजरुस अपनी दो बहनों, मारथा और मरियम … Continue reading “The Story of Lazarus: The Miracle of Resurrection”

The Temptation of Jesus

यह घटना मसीह का प्रलोभन (यानी, परीक्षा) के रूप में जानी जाती है, जो मत्ती (4:1-11) और लूका (4:1-13) के सुसमाचारों में वर्णित है। यह शैतान द्वारा यीशु को दी गई तीन परीक्षाओं की एक श्रृंखला है ।  पृष्ठभूमि   यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले द्वारा यीशु को बपतिस्मा दिए जाने के बाद, पवित्र आत्मा उन्हें … Continue reading “The Temptation of Jesus”

Honor your father and mother—this is the first commandment with a promise

इफिसियों  पत्री (६:२-३) में, वह लिखते हैं: “‘अपने पिता और अपनी माता का आदर कर’—यह पहली आज्ञा है जिसके साथ प्रतिज्ञा भी है—‘कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।” मेरे भाइयों और बहनों, मित्रों, और इस सांसारिक यात्रा के सहयात्रियों, आइए आज हम अपने हृदयों और मनों को एक ऐसी … Continue reading “Honor your father and mother—this is the first commandment with a promise”

Jesus’ triumphal entry into Jerusalem

पृष्ठभूमि येसु मसीह अपनी सेवकाई के अंतिम चरण में थे और फसह पर्व से कुछ ही दिन पहले वह येरूसलेम जा रहे थे। इस यात्रा का उद्देश्य परमेश्वर की उस योजना को पूरा करना था जिसके तहत उन्हें मानवजाति के पापों के प्रायश्चित के लिए क्रूस पर बलिदान होना था। यरीहो से यात्रा करते हुए, … Continue reading “Jesus’ triumphal entry into Jerusalem”

Moses and the Ten Commandments

यह कहानी उस समय की है जब परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों, इस्राएलियों (Israelites) को मिस्र की दासता से मुक्त किया था। मूसा को परमेश्वर ने उनके अगुवे के रूप में चुना था। मूसा के नेतृत्व में, इस्राएलियों ने लाल समुद्र पार किया और मिस्र के फ़िरौन (Pharaoh) के चंगुल से बचकर स्वतंत्रता की … Continue reading “Moses and the Ten Commandments”

The Twelve Disciples of Jesus

जब येसु मसीह ने अपनी सेवकाई शुरू की, तो उन्होंने अपने मिशन को आगे बढ़ाने और लोगों को परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाने के लिए अपने शिष्यों में से बारह पुरुषों को चुना। इन्हें प्रेरित (Apostles) कहा गया। इन बारह लोगों को येसु ने अपने साथ रहने, प्रचार करने और दुष्ट आत्माओं को निकालने … Continue reading “The Twelve Disciples of Jesus”

John the Apostle

परिचय: यीशु का ‘प्रिय शिष्य’ बाइबिल में, यूहन्ना (Yuhanna) सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय प्रेरितों (Apostles) में से एक हैं। वह बारह शिष्यों में सबसे कम उम्र के थे और उन्हें अक्सर “वह शिष्य जिससे यीशु प्रेम करते थे” कहा जाता है। यूहन्ना अपने भाई याकूब (James) के साथ ज़ेबेदी (Zebedee) के पुत्र थे, और वे … Continue reading “John the Apostle”

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